नई दिल्ली : ईरान, इजरायल और अमेरिका के युद्ध के चलते मिडल ईस्ट इस वक्त बारूद के ढेर पर बैठा है. पिछले दिनों से आसमान से मिसाइलें और ड्रोन बरस रहे हैं, ज़मीन पर तबाही का मंजर है और दुनिया तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ी है. लेकिन इस विनाशलीला के बीच पूरी दुनिया की नजरें अब भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिकी हैं. सवाल ये है कि क्या जो काम सुपरपावर अमेरिका नहीं कर पाया, वो भारत कर दिखाएगा?
हैरानी की बात ये नहीं है कि भारत शांति की अपील कर रहा है, बल्कि बड़ी बात ये है कि अब जंग लड़ रहे देश खुद मान रहे हैं कि भारत ही वो ‘संकटमोचन’ है जो इस आग को बुझा सकता है.UAE के बाद अब ईरान ने भी खुलेआम भारत का लोहा मान लिया है.
क्षेत्र में स्थिरता चाहता है ईरान
ईरानी राष्ट्रपति ने बातचीत के दौरान कहा कि उनका देश क्षेत्र में अस्थिरता नहीं चाहता. हाल के हमलों में बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचने के बावजूद ईरान अपने मित्र देशों के साथ सहयोग बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि ईरान बहुपक्षीय मंचों के माध्यम से सहयोग को मजबूत करना चाहता है और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए तैयार है. भारत और ईरान के बीच लंबे समय से मित्रतापूर्ण संबंध रहे हैं. हालिया संकट के दौरान भी दोनों देशों के बीच लगातार संवाद बना हुआ है. ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर दोनों देश संपर्क में हैं.
सूत्रों के अनुसार भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री सेयद अब्बास अरागची के बीच भी हाल के दिनों में बातचीत हुई है. इन वार्ताओं में क्षेत्र की स्थिति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे विषयों पर चर्चा की गई. भारत लंबे समय से संवाद और कूटनीति के जरिए विवादों के समाधान का समर्थन करता रहा है. इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत को संतुलित और शांतिपूर्ण भूमिका निभाने वाला देश माना जाता है.
बीती रात प्रधानमंत्री मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच फोन पर लंबी बातचीत हुई. इस बातचीत के बाद ईरान की तरफ से जो बयान आया, उसने पूरी दुनिया के राजनयिकों को चौंका दिया. ईरान ने माना कि भारत ने इस पूरी जंग के दौरान बहुत ही ‘बैलेंस्ड’ और रचनात्मक भूमिका निभाई है. ईरानी राष्ट्रपति ने साफ लफ्जों में कहा कि भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हमेशा तनाव कम करने की कोशिश की है. ईरान का यह भरोसा जीतना भारत की बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत है, क्योंकि ईरान इस वक्त अमेरिका और इजरायल के सीधे निशाने पर है.
सिर्फ ईरान ही नहीं, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) भी भारत की ‘पावर’ का कायल है. भारत में यूएई के पहले राजदूत हुसैन हसन मिर्ज़ा ने तो यहाँ तक कह दिया कि पीएम मोदी अगर एक फोन घुमा दें, तो यह जंग रुक सकती है.खाड़ी देशों में मोदी का जो सम्मान है, उसे देखते हुए यूएई का मानना है कि दोनों पक्ष उनकी बात नहीं टालेंगे.
ज़मीन पर इसके सबूत भी दिखे हैं. जब अमेरिका-इजरायल के हमले के बाद ईरान ने दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई लाइन ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ को बंद कर दिया, तो पूरी दुनिया में हाहाकार मच गया. लेकिन भारत के साथ अपनी अटूट दोस्ती निभाते हुए ईरान ने भारतीय झंडे वाले जहाजों को वहां से गुजरने की इजाजत दे दी. सूत्र बताते हैं कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री के बीच हुई सीक्रेट बातचीत का ही असर था कि दुनिया के जहाज जहाँ फंसे रह गए, वहीं भारतीय टैंकर शान से निकल गए.