सरकार अब केला, आम, टमाटर और मिर्च जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों की सुरक्षा पर देगी ध्यान
नई दिल्ली : केंद्र सरकार अब केवल न्यूनमत समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद तक सीमित रहने के बजाय किसानों की आय की सीधी सुरक्षा पर फोकस करने जा रही है। खासकर केला, आम, टमाटर एवं मिर्च जैसी जल्दी खराब होने वाली फसलों के लिए ऐसा मॉडल तैयार किया जा रहा है, जिसमें बाजार में कीमत गिरने पर किसानों को अंतर की राशि सीधे खाते में दी जाएगी। यानी फसल खरीदे बिना ही किसानों के नुकसान की भरपाई होगी। यह व्यवस्था प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम आशा) योजना के तहत विकसित की जा रही है, ताकि किसानों को न्यूनतम आय का भरोसा मिल सके।
प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान
सरकार पहले भी कुछ राज्यों में मिर्च और आम जैसी फसलों में इस तरह के प्रयोग कर चुकी है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में मिर्च के किसानों को बाजार भाव गिरने पर सीधे अंतर राशि दी गई थी, जिससे उन्हें नुकसान से राहत मिली। अब इसी मॉडल को व्यापक रूप देने की तैयारी है।
सरकार की चिंता सिर्फ किसानों को कम कीमत मिलने तक सीमित नहीं है, बल्कि खेत और बाजार के बीच बढ़ते मूल्य अंतर को लेकर भी है। कई बार किसान अपनी उपज बहुत कम कीमत पर बेचने को मजबूर होता है, जबकि शहरों में वही उत्पाद कई गुना महंगा बिकता है। सरकार का लक्ष्य इसी अंतर को कम करना है।
दरअसल, मौजूदा एमएसपी प्रणाली मुख्य रूप से गेहूं और धान जैसी फसलों पर केंद्रित है। इन फसलों को लंबे समय तक भंडारित किया जा सकता है। इसलिए सरकार खरीद कर उन्हें बफर स्टाक में जमा कर लेती है, लेकिन फल और सब्जियां जल्दी खराब हो जाती हैं।
केला, आम, टमाटर और मिर्च जैसी फसलों को बड़े स्तर पर खरीदना और रखना व्यावहारिक नहीं है। इससे सरकार पर भारी खर्च और व्यवस्था का दबाव बढ़ता है। यही वजह है कि अब नीति-निर्माता भावांतर भुगतान यानी प्राइस अंतर भरपाई मॉडल को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। इसके तहत सरकार किसी फसल के लिए एक तय कीमत निर्धारित करेगी।
न्यूनतम आय की गारंटी
किसान अपनी उपज बाजार में ही बेचता है। यदि बाजार में कीमत तय स्तर से नीचे चली जाएगी तो सरकार उस अंतर की राशि को सीधे किसान के बैंक खाते में भेज देगी। इससे किसान को न्यूनतम आय की गारंटी मिलेगी, जबकि सरकार को खरीद और भंडारण की जरूरत नहीं पड़ेगी।
हालांकि नई व्यवस्था में कुछ चुनौतियां भी आ सकती हैं। सही बाजार भाव तय करना, फर्जी लेनदेन रोकना और वक्त पर भुगतान करना जरूरी होगा, लेकिन यदि इसे सही तरीके से लागू किया गया तो यह मॉडल जल्दी खराब होने वाली फसल उगने वाले किसानों के लिए बड़ा सहारा बन सकता है और उनकी आय को स्थिर करने में अहम भूमिका निभा सकता है।